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क्या निर्दलीय उमेश कुमार सरकार से भी बड़े हैं?

हम जहांखड़े, सरकार से भी बडे। ऐसी डायलॉगबाजी आपने अक्सर फिल्मों में देखी होगी, जब फिल्म का कोई विलेन पब्लिक के सामने अपना रौब झाड़ने की कोशिश करता है। लेकिन देहरादून के डीएवी कॉलेज में छात्र संघ के मंच पर शेखी बघारने वाले, डींगें हांकने वाले वो उत्तराखण्ड विधानसभा के माननीय विधायक हैं। नाम हैं इनका उमेश कुमार पुत्र जगदीश प्रसाद। वैसे तो मूल रूप से यूपी के हैं लेकिन इनको उत्तराखण्ड इतनी फर्टाइल लैंड लगी कि आज अपना साम्राज्य खड़ा कर चुके हैं। साल 2022 की ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट बता रही है कि 54 करोड़ की घोषित संपत्ति के मालिक उमेश कुमार,उत्तराखंड में सतपाल महाराज के बाद दूसरे सबसे अमीर नेता हैं। इसका पता तब चला था जब उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए चुनाव आयोग को शपथ पत्र दिया था। अब तो उमेश कुमार का रुतबा ऐसा हो गया है कि डीएवी कॉलेज देहरादून के सार्वजनिक मंच से वह किसी को कभी भी, कहीं भी गोली मार देने की बात कह देते हैं और उत्तराखड की पुलिस हो या सरकार को, कोई कानूनी कार्रवाई करने के बजाय गांधारी बन जाती है।

वैसे यह बताना जरूरी है कि डीएवी कॉलेज के मंच से गुंडे-मवालियों जैसी भाषा बोलने वाले यह माननीय उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले की खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक हैं और अक्सर ऐसी वजहों से चर्चा में आते रहे हैं, जिनके बारे में उत्तराखंड के लोगों ने तो शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि हमारे जनप्रतिनिधि ऐसे निकलेंगे।

जैसे उमेश कुमार ने डीएवी के मंच से कहा कि यह देहरादून है। यहां बड़े-बड़े बदमाश आते हैं लेकिन वापस नहीं जाते। यह बात उमेश कुमार ने सही कही कि देहरादून में बड़े-बड़े आते हैं लेकिन वापस नहीं जाते। उमेश कुमार भी देहरादून से वापस नहीं गए और यहीं इतनी तरक्की कर गए कि विधानसभा के मेंबर हैं, लेकिन यही नहीं, उनके जैसे न जाने और भी कितने छोटे-मोटे उमेश कुमार देहरादून के पावर सेंटरों में तगड़ी घुसपैठ करके देहरादून में ही फल-फूल रहे हैं। इसीलिए अगर उमेश कुमार को ये गुमान है कि वो खुद सरकार से भी बड़े हैं, तो ये उत्तराखंड की सरकारों और वहां के सिस्टम पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। उनके होने पर एक बड़ा सवाल है।

तो जैसा कि उमेश कुमार ने भरे मंच से दावा किया कि वो उत्तराखंड में सरकार से भी बड़े हैं, ऐसे में ये जानने की जिज्ञासा तो पैदा होती ही है कि क्या वाकई ऐसा है? हालांकि ये बात किसी से छिपी नहीं है कि उमेश कुमार का चीफ मिनिस्टर पुष्कर सिंह धामी बहुत अच्छा दोस्ताना है। वो कई बार सार्वजनिक मंचों से भी ये क्लेम करते रहे हैं कि मुख्यमंत्री धामी उनकी बात तुरंत मानते हैं लेकिन धामी से पहले भी उमेश कुमार के उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में गहरे दोस्ताने रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत ऐसे ही थोड़े इनके झांसे में आ गए थे। उमेश कुमार उत्तराखंड के नेताओं की एक-एक कमजोर नस जानते हैं और कहा जाता है कि इसका उन्होंने बहुत फायदा भी उठाया।

उमेश कुमार हालांकि अपना भौकाल बनाने के मास्टर आदमी हैं। बड़े और नामी-गिरामी लोगों से या सेलिब्रिटीज से दोस्तियां गांठने, उनके साथ फोटो खिंचवाने और उस नजदीकी की सार्वजनिक नुमाइश करने के वो उस्ताद हैं। इस तरह उन तस्वीरों के जरिये वो अपना पीआर मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। लेकिन उत्तराखंड में उमेश कुमार की जो बड़ी पहचान है, वो ये है कि उमेश कुमार उत्तराखंड की राजनीति की कुछ बड़ी कलंक कथाओं के सूत्रधार भी रहे हैं।

अपनी स्टिंगबाजी की कला से राज्य की एक निर्वाचित सरकार को गिराने का महानतम कार्य उन्हीं के सौजन्य से हुआ है। ये वही उमेश कुमार हैं जोकि विधानसभा में फेंक गए कि धामी सरकार को गिराने के लिए 500 करोड़ रुपये का दांव लगाया गया, हालांकि वो न नाम बताए पाए न साबित कर पाए। न ही सरकार ने उस पर जांच ही बैठाई। उमेश कुमार हिट एंट रन करके मुस्कुराके चल दिए।

ये वही उमेश कुमार हैं जोकि उत्तराखंड की राजनीति के एक अजीबोगरीब मॉडल कुवर प्रणव सिंह चैंपियन से खुलेआम बंदूक-बंदूक खेलते हुए और गाली-गलौज का आदान-प्रदान करते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। इतने महानतम कार्यों के बावजूद उमेश कुमार का कोई बाल भी बांका नहीं कर पाया तो उनके इस शेखी बघारने पर यकीन कर लेने का मन करता है कि वाकई उमेश कुमार उत्तराखंड में सरकार से भी बड़े हैं।

वैसे उमेश कुमार उत्तराखंड में अगर सरकार से बड़े नहीं होते तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनको अयोग्य घोषित करने की फाइल पर विधानसभा की अध्यक्ष अब तक कोई न कोई कार्रवाई कर ही देतीं। उमेश कुमार की विधायकी पर कब से तलवार लटकी हुई है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि मानो स्पीकर साहिबा उस फाइल पर कुंडली मारे बैठी हों। फैसला लेने को राजी नहीं हैं। इस बात को चार साल हो गए हैं। अब तो कार्यकाल भी खत्म होने की ओर है।

वैसे उमेश कुमार कितने बड़े हैं, इसकी एक झलक चुनाव आयोग को दिए उनके हलफनामे में भी दिखती है। साल 2022 में जब उमेश कुमार पहली बार हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर चुनाव में उतरे थे तो उन्होंने चुनाव आयोग को जो शपथ पत्र दिया, उसे पढ़कर कोई भी हैरान रह जाएगा। वो शपथ पत्र एक तरह से उमेश कुमार की कुंडली टाइप है। तो अगले कुछ मिनट इस वीडियो को बड़े गौर से देखिएगा क्योंकि उस शपथ पत्र के हवाले से मैं जो तथ्य आपके सामने रखने जा रहा हूं, उसे सुनकर आपकी भी आंखें फटी रह जाएंगी। चुनाव आयोग में जमा उमेश कुमार का ये शपथ पत्र वैसे पब्लिक डॉक्यूमेंट है और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर आप भी इसे देख सकते हैं और उसे क्रॉस चेक कर सकते हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब खानपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरे तो उन्होंने चुनाव आयोग को जो शपथ पत्र दिया है उसमें लिखा है कि उनके खिलाफ 13 आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें जो धारायें लगी हैं, वो जरा समझ लेते हैं, जैसे—

धारा है 386- जान से मारने या गंभीर चोट पहुँचाने का डर दिखाकर जबरन वसूली करना
धारा 388- किसी को झूठे केस में फंसाने का डर दिखाकर जबरन पैसे या कीमती सामान लेना
धारा 120बी- आपराधिक साजिश में भागीदारी
धारा 147- दंगा या बलवा करना
धारा 148- घातक हथियार से लैस होकर उपद्रव करना
धारा 149- गैर कानूनी तरीके से सभा करना
धारा 427- जानबूझकर किसी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना
धारा 452- किसी व्यक्ति के घर में घुसकर हमला करना और उसे नुकसान पहुंचाना

शपथ पत्र के मुताबिक, इसी तरह कुछ मामलों में उनके खिलाफ—
धारा 506- किसी को नुकसान पहुँचाने, जान से मारने, संपत्ति नष्ट करने की धमकी देना
धारा 124A- यानी राजद्रोह
धारा 387- रंगदारी या जबरन वसूली
धारा 389- किसी को गंभीर अपराध के झूठे आरोप का डर दिखाकर जबरन उगाही

धारा 504- शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना
PC Act, 1988- सरकारी अधिकारी को रिश्वत का लालच देकर काम कराने का प्रयास
धारा 420- धोखाधड़ी और बेईमानी
धारा 467- जाली दस्तावेज बनाना

धारा 471- दस्तावेजों में हेरफेर कर अपने कब्जे में रखना और इस्तेमाल करने का इरादा रखना
धारा 419- फर्जी आईडी का उपयोग करके धोखाधड़ी करना
धारा 474- फर्जी तरीके से तैयार दस्तावेज़ों को असली मानकर इस्तेमाल करना
धारा 500- मानहानि

यही नहीं, चुनाव आयोग में जमा शपथ पत्र के मुताबिक, उमेश कुमार के खिलाफ—
धारा 463 और 465- जालसाजी
धारा 356- किसी की संपत्ति को चोरी करने का प्रयास
धारा 323- जान-बूझकर मारपीट करना
धारा 325- जान-बूझकर किसी को गंभीर चोट पहुंचाना जैसी धारायें दर्ज हैं

हैरानी की बात ये है कि उमेश कुमार के खिलाफ इन अपराधिक मुकदमों का दायरा उत्तराखण्ड से लेकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। चुनाव आयोग को दिए 2022 के शपथ पत्र के मुताबिक, उमेश कुमार के खिलाफ कुछ मामले पेंडिंग हैं, एक मामले में कोलकाता हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है और कुछ मामलों में उमेश कुमार पर दोष सिद्ध भी हो चुका है। जिन मामले में वो दोषी साबित हुए हैं, उनमें एक है न्यायालय की अवमानना। एक मामले में उमेश कुमार को कलकत्ता हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली हुई है।

अब शपथ पत्र में जरा उनकी घोषित संपत्तियों के बारे में भी आपको बता देते हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में उमेश कुमार ने अपनी कुल संपत्ति 54 करोड़ 89 लाख 16 हजार 580 रुपये घोषित की। हालांकि इसके दो साल बाद यानी 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में जो शपथ पत्र उन्होंने दिया, उसके मुताबिक उनकी संपत्ति बढ़कर 75 करोड़ रुपये हो गई।

खैर, 2022 में उनके घोषित शपथ पत्र के मुताबिक उमेश कुमार के पास लग्जरी गाड़ियों का बड़ा जखीरा है। उनके पास लैंड क्रूजर, मर्सिडीज, जगुआर समेत 12 गाड़ियां हैं। 2 गाड़ियां उनकी पत्नी के नाम पर हैं। कुल 14 गाड़ियां दोनों के नाम पर हैं। ये सब घोषित हैं, जो उन्होंने चुनाव आयोग को बताया है। बाकी उनका हेलिकॉप्टर में घूमना और अपने गेस्ट को घुमाना, ये कहां से आया, ये किसका है, इसका इस शपथ पत्र में कोई जिक्र नहीं दिख रहा है।

उमेश कुमार ने 4 साल पहले चुनाव आयोग के सामने अपनी जो अचल संपत्ति घोषित की है, उनमें इनके और पत्नी के नाम पर यूपी के खतौली में कृषि भूमि है, नोएडा में प्लॉट है, देहरादून में प्लॉट है, देहरादून के राजपुर रोड में फ्लैट है, देहरादून के ओल्ड सर्वे रोड पर रिहायशी मकान है। तो 2022 के एफिडेविट के मुताबिक उमेश कुमार के पास कुल 28 करोड़ 3 लाख 50 हजार रुपये की अचल संपत्ति है, जबकि इनकी पत्नी के नाम पर 17 करोड़ 81 लाख रुपये की अचल संपत्ति है। उमेश कुमार ने अपने शपथ पत्र में खुद को किसान भी बताया है, मीडिया एडवाइजर भी बताया है और कुछ फर्मों का मालिक भी बताया है, जहां से इन्होंने लाभांश मिलने की बात कही है।

तो ये उनके 2022 के शपथ पत्र की हाईलाइट्स हैं। बाकी तब से 4 साल गुजर चुके हैं। उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों का क्या अपडेट है, उनकी संपत्तियां कहां से कहां पहुंच गई हैं, इसकी जानकारी शायद 2027 के विधानसभा चुनाव में ही पता चलेगी जब वो चुनाव आयोग के सामने नया शपथ पत्र जमा करेंगे।

लेकिन उमेश कुमार को करीब से जानने वाले लोगों को भी पता है कि उमेश कुमार ऐसे तमाम शपथ पत्रों से भी आगे की चीज हैं। कई लोगों को उमेश कुमार की दौलत चमत्कारिक लगती है। वरना यूपी से आकर देहरादून में जम जाने वाले ये शख्स कभी एक पुराने से स्कूटर से चला करते थे, ऐसा देहरादून में कई पुराने पत्रकारों से पता चला। और फिर उन्होंने देहरादून में हमारे यहां के नेताओं से, अफसरों से और सत्ता प्रतिष्ठान के चक्कर लगाने वाले बड़े लोगों से दोस्तियां गांठते-गांठते स्वर्ग की सीढ़ियां तलाश लीं। और फिर देखते ही देखते हमारे ही नेताओं के संरक्षण की बदौलत अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे।

और विडंबना देखिए कि इस राज्य का मूल निवासी तो राज्य बनने के ढाई दशक बाद आज भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, सड़क जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए ही संघर्ष कर रहा है। उमेश कुमार तो अब उत्तराखंड की राजनीति को भी प्रभावित करने की स्थिति में हैं और इसकी झलक वो गाहे-बगाहे दिखा भी चुके हैं। कभी-कभी तो लगता है कि ये राज्य उमेश कुमार जैसे लोगों के लिए ही बना है।

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