April 24, 2026
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आजकल

क्या निर्दलीय उमेश कुमार सरकार से भी बड़े हैं?

हम जहांखड़े, सरकार से भी बडे। ऐसी डायलॉगबाजी आपने अक्सर फिल्मों में देखी होगी, जब फिल्म का कोई विलेन पब्लिक के सामने अपना रौब झाड़ने की कोशिश करता है। लेकिन देहरादून के डीएवी कॉलेज में छात्र संघ के मंच पर शेखी बघारने वाले, डींगें हांकने वाले वो उत्तराखण्ड विधानसभा के माननीय विधायक हैं। नाम हैं

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आजकल

धामी सरकार का ‘कोश्यारी रूट’

अगर आपको ये लग रहा है कि भगत सिंह कोश्यारी साहब महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से रहस्मयी परिस्थितियों में इस्तीफा देने के बाद से गायब हो गए हैं तो ये भ्रम हो सकता है…क्योंकि उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी सरकार में भगत सिंह कोश्यारी एक अदृश्य शक्ति की तरह मौजूद हैं….फिल्मी अंदाज में कहें तो

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किस्सागोई

नैनीताल में कभी घोड़े-खच्चरों को मिलता था ‘वीकली ऑफ’- मनु पंवार

आपको ध्यान होगा कि देश की दूसरी बडी आईटी कंपनी इन्फोसिस के को-फाउंडर एन. नारायण मूर्ति ने कुछ समय पहले एक बयान देकर अपनी भारी फजीहत करा डाली थी। उन्होंने ज्ञान दिया था कि आज के युवाओं को सफल होने के लिए हर हफ्ते लगभग 70 घंटे काम करना चाहिए। इसका मतलब कि अगर किसी

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Blog

टिहरी के राजा ने बिना सड़क के पहाड़ पर चढ़ा दी थी गाड़ी! — मनु पंवार

पहले मुर्गी आई या अंडा—इसी तर्ज पर अगर पूछा जाए कि पहले सड़क आई या कार, तो सहज उत्तर होगा कि पहले सड़क बनेगी, तभी गाड़ी चलेगी। जहां सड़क न हो, वहां गाड़ी कैसे चल सकती है? लेकिन उत्तराखण्ड के एक नगर में इसका उलटा हुआ—वहाँ सड़क बाद में बनी और गाड़ी पहले पहुँच गई।

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खोजबीन

कहां गायब हो रहे हैं पारंपरिक पहाड़ी घर?

ये तस्वीरें हमारे गांव की हैं। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में है गांव। ढलाऊ छत वाले मिट्टी-पत्थर के ऐसे मकान हमारे पहाड़ी गांवों की ख़ास पहचान रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत तो ये है कि ये बर्फीले/सर्द मौसम में भी आपको गुमटी (गर्माहट) देते हैं। मिट्टी के फर्श तापमान को मेन्टेन किये रखते

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लोग-बाग

बी.मोहन नेगी: उनके हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं

चित्रकार बी.मोहन नेगी ‘मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो, मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं।‘ जगजीत सिंह की गायी राजेश रेड्डी की ग़ज़ल की ये पंक्तियां अक्सर कानों में गूंजती है. बी.मोहन नेगी का जब कभी भी ज़िक्र आता है, तो मुझे ये पंक्तियां बरबस ही याद आ जाती

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घूमघाम

अंग्रेज क्या छोड़कर गए?

उत्तराखंड के चकराता के पास डाक बंगला हमें फ़िल्म ‘शोले’ का शुक्रगुज़ार होना चाहिए जो ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ वाले डायलॉग के ज़रिये हमें अंग्रेज़ों का ज़माना याद दिलाता है. हालांकि फिल्म में ‘अंग्रेज़ों के ज़माने का जेलर’ भले ही असरानी का सिर्फ तकिया-कलाम ही था, लेकिन अंग्रेज़ों के ज़माने की कई चीज़ें अब

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खोजबीन

हरिद्वार या हरद्वार : सही नाम क्या है?

क्या आपने कभी सोचा कई जगह आपको हरिद्वार का नाम अंग्रेजी में हरद्वार क्यों लिखा मिलता है? जब इसका नाम हरिद्वार है-तो अंग्रेजी में भी  H-A-R-I-D-W-A-R होना चाहिए, लेकिन बहुत सी जगहों में इसका अंग्रेजी नाम हमें हरद्वार-यानी  H-A-R-D-W-A-R लिखा मिलता है…ऐसा क्यों होता है? इस वीडियो में इस रहस्य को टटोलने की कोशिश करते हैं,और

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किस्सागोई

…जब एचएन बहुगुणा ने इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ ‘देवता’ नचाया

( भारतीय राजनीति में हेमवती नन्दन बहुगुणा की गिनती एक धाकड़ और विद्रोही किस्म के नेताओं में होती है. वो किस कदर निडर लीडर थे, इसका एक बहुत ही दिलचस्प किस्सा है. जब उन्होंने इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ देश की राजधानी में गढ़वाली में एक व्यंग्य गीत गाया और ढोल बजाया था. उस किस्से को विस्तार से मैंने

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लोग-बाग

मेरे अध्यापक, जिन्होंने विविधता के सौंदर्य की समझ विकसित की

इंद्र मोहन मुदगिल. यही नाम था हमारे स्कूल के प्रिंसिपल का, जिन्होंने हमें पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक सीख दी. जिन्होंने पेड़ों की अहमियत बताई. फूलों के होने का मतलब समझाया. जिन्होंने आंगन में दूब के उगने का अर्थ बतलाया. जिन्होंने बगीचे को संवारने का शऊर दिया और फलदार वृक्षों की महत्ता समझाई. वो मुदगिल साहब ही

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