August 9, 2026

लिखा-पढ़ी

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शायर डॉ. नवाज देवबंदी के साथ उस दिन की फोटो  “जिन पर लुटा चुका था मैं दुनिया की दौलतें     उन वारिसों ने मुझको कफ़न नाप कर दिया।“ लिखना हुआ तो यह हुआ कि मुहावरा बन जाए। ऐसे कई शायर/ कवि अनाम रह गए मगर उनकी शायरी/ कवितायें लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गईं। डॉ.नवाज़ देवबंदी

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स्मृति शेष : मंगलेश डबराल काफलपाणी कि वो ‘लालटेन’ जिसने दुनिया में रोशनी फैलाई

हो सकता है कि काफलपानी गांव के बारे में टिहरी के बाहर बहुत लोगों को पता न हो। लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में लोगों ने काफलपानी का नाम सुना हुआ है। वो इसलिए क्योंकि वहां मंगलेश डबराल पैदा हुए थे। हमारे देश के जाने-माने कवि, लेखक, सम्पादक, अनुवादक मंगलेश डबराल। वह कवि जो सबसे

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‘किन्नर’ से लड़ता किन्नौर मनु पंवार

‘यदि होता किन्नर नरेश मैं राजमहल में रहता सोने का सिंहासन होता सिर पर मुकुट चमकता’ द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की इस कविता से गुजरना किसी स्वप्नलोक की सैर करने जैसा है। बचपन में इस कविता को पढ़कर सोचा करते थे कि आखिर वह किन्नर देश सचमुच में होगा कैसे?  इस पूरी कविता की एक-एक पंक्ति

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