August 29, 2026

Uttarakhand Heritage

किस्सागोई

टिहरी के राजा ने बिना सड़क के पहाड़ पर चढ़ा दी थी गाड़ी!

पहले मुर्गी आई या अंडा—इसी तर्ज पर अगर पूछा जाए कि पहले सड़क आई या कार, तो सहज उत्तर होगा कि पहले सड़क बनेगी, तभी गाड़ी चलेगी। जहां सड़क न हो, वहां गाड़ी कैसे चल सकती है? लेकिन उत्तराखण्ड के एक नगर में इसका उलटा हुआ—वहाँ सड़क बाद में बनी और गाड़ी पहले पहुँच गई।

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कहां गायब हो रहे हैं पारंपरिक पहाड़ी घर?

ये तस्वीरें हमारे गांव की हैं। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में है गांव। ढलाऊ छत वाले मिट्टी-पत्थर के ऐसे मकान हमारे पहाड़ी गांवों की ख़ास पहचान रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत तो ये है कि ये बर्फीले/सर्द मौसम में भी आपको गुमटी (गर्माहट) देते हैं। मिट्टी के फर्श तापमान को मेन्टेन किये रखते

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चले आए शिवजी की बारात में !

  बचपन का किस्सा है. पहाड़ में कई बार स्कूल जाते वक्त कोई किताब, कॉपी या पेन-पेंसिल घर में छूट जाती थी या होमवर्क करके नहीं जाते थे, तो क्लास में मास्साब अक्सर ताना मारा करते थे. कहते-‘क्या शिवजी की बारात में आए हो?’  हमारे मास्टरजी का यह ताना उनका तकियाकलाम टाइप बन गया था. न

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