May 1, 2026
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राग-रंग

राग-रंग

कहां से निकला गढ़वाली लोकगीत ‘राजा की बग्वानी मोर नाचला झुमैलो’?

राजा की बग्वानी मोर नाचाला झूमैलो….ये गढ़वाली झुमैलो गीत को हम बचपन से सुनते आ रहे हैं…मुमकिन है कि आप में से बहुत से लोगों ने ये गढ़वाली लोकगीत सुना होगा…या आप में से जिनका वास्ता गढ़वाल के गांवों से रहा है…उन्होंने बसंत पंचमी से लेकर बिखौती यानी बैसाखी तक चौक में यानी आंगन में

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राग-रंग

जो बड़े-बड़े उस्ताद न कर सके, वो पौड़ी के मोहन ने कर दिखाया

पण्डित मोहन सिंह रावत। यही नाम है पहाड़ के इन विलक्षण संगीतज्ञ का, जिन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में वो कर दिखाया है जोकि चुनींदा हस्तियां ही कर पाई हैं। जैसे उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खां साहब ने ब्याह-शादियों में बजने वाले साज़ शहनाई को वहां से उठाकर हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में स्थापित कर दिया। कौड़ी के

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