October 13, 2026

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आजकल

अंकिता भंडारी केस में अब सीबीआई क्या उखाड़ लेगी?

ऐसे समय में जबकि देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कारगुजारी के खिलाफ पूरा विपक्ष सड़क पर था, तब राष्ट्रपति भवन से 12 अक्टूबर 2026 को 6 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए जाने की एक लिस्ट आती है। उस लिस्ट के मुताबिक ओम प्रकाश माथुर को केरलम, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु, ब्रज मोहन राम

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आजकल

पहाड़ के प्राचीन मंदिरों को कॉरिडोर बनाने की सनक क्या है?

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों उत्तरकाशी के प्रसिद्ध काशी-विश्वनाथ मंदिर को कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन और रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया जाएगा। लेकिन यह बात एकदम गले नहीं उतर रही है। सबसे पहली बात तो यही है कि आखिर उत्तराखण्ड सरकार

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आजकल

क्या अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब धामी सरकार से कोई उम्मीद नहीं?

पता नहीं अब कितनों को याद होगा कि अंकिता भंडारी मर्डर केस में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की घोषणा की थी। इस बात को महीनों गुजर गए हैं, सीबीआई जांच का क्या हुआ? क्या वाकई सीबीआई जांच हो भी रही है या फिर CBI जांच की घोषणा सिर्फ उस वक्त

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आजकल

क्या निर्दलीय उमेश कुमार सरकार से भी बड़े हैं?

हम जहांखड़े, सरकार से भी बडे। ऐसी डायलॉगबाजी आपने अक्सर फिल्मों में देखी होगी, जब फिल्म का कोई विलेन पब्लिक के सामने अपना रौब झाड़ने की कोशिश करता है। लेकिन देहरादून के डीएवी कॉलेज में छात्र संघ के मंच पर शेखी बघारने वाले, डींगें हांकने वाले वो उत्तराखण्ड विधानसभा के माननीय विधायक हैं। नाम हैं

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आजकल

धामी सरकार का ‘कोश्यारी रूट’

अगर आपको ये लग रहा है कि भगत सिंह कोश्यारी साहब महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से रहस्मयी परिस्थितियों में इस्तीफा देने के बाद से गायब हो गए हैं तो ये भ्रम हो सकता है…क्योंकि उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी सरकार में भगत सिंह कोश्यारी एक अदृश्य शक्ति की तरह मौजूद हैं….फिल्मी अंदाज में कहें तो

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किस्सागोई

नैनीताल में कभी घोड़े-खच्चरों को मिलता था ‘वीकली ऑफ’

आपको ध्यान होगा कि देश की दूसरी बडी आईटी कंपनी इन्फोसिस के को-फाउंडर एन. नारायण मूर्ति ने कुछ समय पहले एक बयान देकर अपनी भारी फजीहत करा डाली थी। उन्होंने ज्ञान दिया था कि आज के युवाओं को सफल होने के लिए हर हफ्ते लगभग 70 घंटे काम करना चाहिए। इसका मतलब कि अगर किसी

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किस्सागोई

टिहरी के राजा ने बिना सड़क के पहाड़ पर चढ़ा दी थी गाड़ी!

पहले मुर्गी आई या अंडा—इसी तर्ज पर अगर पूछा जाए कि पहले सड़क आई या कार, तो सहज उत्तर होगा कि पहले सड़क बनेगी, तभी गाड़ी चलेगी। जहां सड़क न हो, वहां गाड़ी कैसे चल सकती है? लेकिन उत्तराखण्ड के एक नगर में इसका उलटा हुआ—वहाँ सड़क बाद में बनी और गाड़ी पहले पहुँच गई।

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खोजबीन

कहां गायब हो रहे हैं पारंपरिक पहाड़ी घर?

ये तस्वीरें हमारे गांव की हैं। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में है गांव। ढलाऊ छत वाले मिट्टी-पत्थर के ऐसे मकान हमारे पहाड़ी गांवों की ख़ास पहचान रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत तो ये है कि ये बर्फीले/सर्द मौसम में भी आपको गुमटी (गर्माहट) देते हैं। मिट्टी के फर्श तापमान को मेन्टेन किये रखते

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लोग-बाग

बी.मोहन नेगी: उनके हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं

चित्रकार बी.मोहन नेगी ‘मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो, मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं।‘ जगजीत सिंह की गायी राजेश रेड्डी की ग़ज़ल की ये पंक्तियां अक्सर कानों में गूंजती है. बी.मोहन नेगी का जब कभी भी ज़िक्र आता है, तो मुझे ये पंक्तियां बरबस ही याद आ जाती

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घूमघाम

अंग्रेज क्या छोड़कर गए?

उत्तराखंड के चकराता के पास डाक बंगला हमें फ़िल्म ‘शोले’ का शुक्रगुज़ार होना चाहिए जो ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ वाले डायलॉग के ज़रिये हमें अंग्रेज़ों का ज़माना याद दिलाता है. हालांकि फिल्म में ‘अंग्रेज़ों के ज़माने का जेलर’ भले ही असरानी का सिर्फ तकिया-कलाम ही था, लेकिन अंग्रेज़ों के ज़माने की कई चीज़ें अब

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