April 15, 2026
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किस्सागोई

…जब मैं सचिन के सामने नि:शब्द था

यह वर्ष 2002 के नवम्बर महीने की ही बात है। यानी आज से करीब 17 साल पहले। उस समय मैं उत्तर भारत के एक प्रमुख अख़बार ‘अमर उजाला’ के हिमाचल प्रदेश ब्यूरो में शिमला में बतौर संवाददाता कार्यरत् था। उन दिनों वेस्टइंडीज़ की क्रिकेट टीम भारत दौरे पर आई हुई थी। लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव

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आजकल लोग-बाग

कृपया दरवाजों से हटकर खड़े हों !

शम्मी नारंग के साथ मुलाकात की एक तस्वीर कुछ आवाज़ें, कुछ छवियां ज़ेहन में हमेशा ताज़ा रहती हैं. बरसों तक, दशकों तक, उम्र भर गूंजती रहती हैं. शम्मी नारंग भी ऐसी ही शख्सियत हैं. बहुत ज्यादा वक़्त नहीं बीता है लेकिन मानो एक युग गुज़र गया है. दूरदर्शन के युग में, जबकि टेलीविज़न न्यूज़ में

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आजकल

अथश्री ‘इलीगल’ कथा !

बात उन दिनों की है जब हम शिमला में अख़बार में पत्रकारिता किया करते थे. शिमला में अवैध निर्माण से जुड़ी एक स्टोरी का पीछा करते-करते कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे कि दंग रह गया. शायद वो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की रिपोर्ट थी. जिससे पता चला कि शिमला में हाईकोर्ट की बहुमंजिला इमारत

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घूमघाम

यहां पानी के टैंक के ऊपर शपथ लेती है सरकार !

शिमला में इसी रिज़ मैदान पर नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो रहा है नहीं..नहीं…. ये वो पानी की टंकी नहीं है जिस पर चढ़कर ‘शोले’ का बीरू दारू की बोतल लेके कूदकर जान दे देने की धमकी देता है. ये पानी का विशालकाय टैंक है शिमला के फेमस रिज़ मैदान पर, जो ब्रिटिशकाल

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लोग-बाग

चले आए शिवजी की बारात में !

हमारी नगरी पौड़ी (उत्तराखंड) के क्यूंकालेश्वर में शिव की मूरत बचपन का किस्सा है. पहाड़ में कई बार स्कूल जाते वक्त कोई किताब, कॉपी या पेन-पेंसिल घर में छूट जाती थी या होमवर्क करके नहीं जाते थे, तो क्लास में मास्साब अक्सर ताना मारा करते थे. कहते-‘क्या शिवजी की बारात में आए हो?’  हमारे मास्टरजी का

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आजकल

श्रीकृष्ण की राजनीति के कितने करीब है आज की राजनीति?

(दिवंगत राजेन टोडरिया हमारे समय के धाकड़ पत्रकार / लेखक रहे हैं. वह हमारे बॉस भी रहे और मेंटॉर भी. राजेनजी की पत्रकारिता उत्तराखण्ड से शुरू होकर हिमाचल तक गई. वह हिमाचल में ‘दैनिक भास्कर‘ के संपादक थे. उससे पहले ‘अमर उजाला‘ अख़बार में हिमाचल प्रभारी थे. उनकी लेखनी बेहद धारदार और कमाल की थी. फरवरी 2013

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लोग-बाग

इस ‘पण्डत’ को हिमाचल नहीं भुला पाएगा

हिमाचल प्रदेश में सुखराम अपने समर्थकों/प्रशंसकों के बीच ‘पण्डत सुखराम’ के नाम से जाने जाते थे. समर्थकों के लिए वो देश में संचार क्रांति के मसीहा रहे हैं. हालांकि बहुत से लोगों को उनका नाम इसलिए याद होगा क्योंकि वो नरसिम्हा राव सरकार में हुए संचार घोटाले के आरोपी थे. जो उनके नाम से कतई

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खान-पान

जख्या : गाली भी और स्वाद भी !

यह है जख्या, काले-भूरे दाने वाला बीज ऐसा आपने कई लोगों के मुंह से और अक्सर सुना होगा- अजी! आपकी तो गाली भी हमारे लिए आशीर्वाद की तरह है. अब आप ही बताइए, ये भला कैसे हो सकता है कि बंदा आपको गाली दिए जाए और आप आशीर्वाद समझकर उसे अपने सिर माथे रख दें?

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खान-पान

घर-घर महक रहे विपिन के मसाले

हमारी रसोई में लंबे समय से पहाड़ी मसाले महक रहे हैं, वो भी विपिन पंवार की बदौलत. वैसे इसमें कोई अचरज नहीं है लेकिन इस महक के पीछे एक युवा की जी-तोड़ मेहनत, उनका जज़्बा, उनका पुरुषार्थ है. विपिन कभी दिल्ली में रहते थे, अब उत्तराखण्ड के टिहरी ज़िले के प्रतापनगर में अपने गांव में

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रहन-सहन

कहां गायब हो रहे हैं पारंपरिक पहाड़ी घर?

ये तस्वीरें हमारे गांव की हैं। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में है गांव। ढलाऊ छत वाले मिट्टी-पत्थर के ऐसे मकान हमारे पहाड़ी गांवों की ख़ास पहचान रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत तो ये है कि ये बर्फीले/सर्द मौसम में भी आपको गुमटी (गर्माहट) देते हैं। मिट्टी के फर्श तापमान को मेन्टेन किये रखते

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