पत्रकारिता की फिक्र छोड़िए, पहले समाज को बचाइए
गांव की बचपन की यादें हैं। जो पहाड़ में रहे हैं या अभी रह रहे हैं, उन्हें तो पता ही होगा। हमारे गांव के पुंगड़ों (खेतों) में लोग अक्सर खड़ी फसल के बीच कुछ-कुछ फासले पर पुतले खड़े कर दिया करते थे। फटे-पुराने, अनुपयोगी कपड़ों से बने या घास-फूस से बने पुतले। पुतलों को कुछ



