May 11, 2026
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लव इन ‘श्यामला’ मनु पंवार

ऐसे समय में जबकि 21वीं सदी में भारत में स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणाओं ने अभी ज़मीन भी नहीं पकड़ी है, अंग्रेजों द्वारा 19वीं सदी में खूबसूरत पहाड़ियों पर बसाई अपनी तरह की ‘स्मार्ट सिटी’ शिमला का नाम बदलने की चर्चाओं ने ज़ोर पकड़ लिया है। शिमला का नाम बदलकर ‘श्यामला’ किए जाने की मुहिम शुरू हो गई है, जिसे खुद हिमाचल की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हवा दी है।

वैसे शिमला के नामकरण के बीज ‘श्यामला’ से ही पड़े हैं जोकि 19वीं सदी की शुरुआत तक एक नाम भर का गांव था और पूरा इलाका घनघोर जंगल था। ‘श्यामला’ नाम भी स्थानीय श्यामला देवी के नाम पर बताया जाता है, हालांकि उस देवी का शिमला में आज न तो कोई मंदिर है और न ही वह लोकस्मृतियों में ही है। ऐसा कहा जाता है कि ये जगह तब कैंथल के राणा द्वारा 1815 में पटियाला के महाराजा को दी गई थी, जिन्होंने गोरखा युद्ध में सहायता करने के ऐवज में इसे अंग्रेज़ों को सौंप दिया था।

शिमला के नामकरण से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा और भी है। 1870 में प्रकाशित ‘सिमला गाइड’ में डब्ल्यू एच कैरी ने शिमला का नामकरण जाखू में नीले पठालों की छत वाले एक घर के नाम से होना बताया है। ‘श्यीमलय’ नाम का वो घर ब्रिटिश राज में बंदोबस्त का पहला केंद्रक भी माना जाता है। वो घर जाखू में एक फकीर का था। लेकिन तब पहाड़ के लोगों द्वारा ‘श्यीमलय’ को ‘शिमला’ या ‘शुमला’ ही उच्चारित किया जाता था। कैरी ने लिखा है कि स्थानीय लोगों के इसी उच्चारण की वजह से हिल स्टेशन शिमला को अपना मौजूदा नाम मिला, वरना अंग्रेज़ों ने इसे ‘सिमला’ ही लिखा और पुकारा है।

1870 में प्रकाशित ‘सिमला गाइड’ में डब्ल्यू एच कैरी ने चर्चित मिशनरी और शिक्षाविद रेवरेंड जेम्स लॉन्ग के हवाले से इसका उल्लेख किया है।  रेवरेंड जेम्स लॉन्ग ने 19वीं सदी में तीन दशक से भी ज्यादा समय भारत में गुजारा था। शिमला के नामकरण से जुड़े इस दिलचस्प किस्से का ज़िक्र सर एडवर्ड जॉन बक ने 1904 में प्रकाशित अपनी किताब ‘सिमला, पास्ट एंड प्रजेंट’ में भी किया। एडवर्ड जॉन बक ने अपनी किताब में उस फकीर के झोपड़े का ज़िक्र दो स्कॉटिश अफसरों की 30 अगस्त 1817 की डायरी में भी होने की बात लिखी है।

लेकिन जिस शिमला की दुनिया में मशहूरियत है, वो पूरी तरह से अंग्रेज़ों का ईजाद किया हुआ है, यह कोई बसी-बसाई जगह नहीं थी। शिमला को बसाने में चार्ल्स प्रैट कैनेडी का अहम रोल माना जाता है, जिन्हें अंग्रेजों ने पहाड़ी रियासतों का पॉलिटिकल ऑफिसर नियुक्त किया था. सन 1822 में उन्होंने यहां पहला घर बनाया जिसे ‘कैनेडी हाउस’ के नाम से जाना गया. मौजूदा विधानसभा भवन के पास इसी कैनेडी हाउस से 1825 में शिमला का एक स्केच तैयार करके लंदन भेजा गया था। उसको देखने के बाद ही अंग्रेजी हुकूमत में शिमला को लेकर दिलचस्पी जगी। फिर तो अंग्रेजों ने सात पहाड़ियों पर शिमला के नाम से अपने लिए एक सपनीली दुनिया बसा ली। इसे करीब 16 हजार की आबादी के लिए डिजाइन किया गया। यहां पानी का ऐसा सिस्टम तैयार किया, जिस पर शिमला आज तक निर्भर है। बिजली और संचार सेवाएं दीं। ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया। यूरोपीय शैली की दिलकश इमारतें बनाईं। पहाड़ों का सीना चीरकर ट्रेन तक पहुंचा दी। एक शानदार सिस्टम तैयार किया। म्यूनिसिपल गवर्नमेंट दी। सारी सुख सुविधायें जुटाई गई। करीब डेढ़ सौ साल पहले किसी स्मार्ट सिटी को मात देता था शिमला। उसी दौर में यह एक आदर्श पहाड़ी नगर बना। 1864 में इसे ब्रिटिश भारत की समर कैपिटल बना दिया गया।

शिमला से ही हिंदुस्तान पर अंग्रेजों ने राज किया। शिमला से ही हिंदुस्तान की तकदीर लिखी गई। शिमला में ही हिंदुस्तान के विभाजन पर मुहर लगी। उस ‘शिमला’ को ‘श्यामला’ तो कर देंगे लेकिन इसके अंदर तो पग-पग पर अनेक ‘शिमला’ बसे हुए हैं। रिज़, द मॉल, वायस रीगल लॉज, स्कैंडल पॉइन्ट, कंबरमेयर,ऑकलैंड हाउस, यूएस क्लब, अनाडेल, प्रोसपेक्ट हिल्स, समर हिल्स, डेजी बैंक, रिचमंड, चैप्सली, गॉर्टन कैसल, बैंटनी कैसल, लॉन्ग वुड, एलर्जली हाउस, बैनमोर, ओक ओवर…इन सब ‘गुलाम’ पहचानों का क्या होगा?  ‘गुलामी की इन निशानियों’ को कैसे खुरचोगे?

मुझे 1960 में बनी आरके नैय्यर की फिल्म ‘लव इन सिमला’ के एक गाने के बोल याद आ रहे हैं-

तेरी तस्वीर चली आई है बहलाने को

और दीवाना बना रखा है दीवाने को।

 

Admin
Manu Panwar is the Founder of Himalayan Talks and a distinguished Broadcaster, Author, and Columnist with a career spanning nearly 30 years. A veteran of the Indian media landscape, he has held pivotal leadership roles at premier Television networks including ABP News, STAR News, India TV, and Sahara India Television.Began his journey in 1996 as a Reporter for the prominent Hindi daily Amar Ujala.

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