May 7, 2026
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चले आए शिवजी की बारात में !

हमारी नगरी पौड़ी (उत्तराखंड) के क्यूंकालेश्वर में शिव की मूरत

बचपन का किस्सा है. पहाड़ में कई बार स्कूल जाते वक्त कोई किताब, कॉपी या पेन-पेंसिल घर में छूट जाती थी या होमवर्क करके नहीं जाते थे, तो क्लास में मास्साब अक्सर ताना मारा करते थे. कहते-क्या शिवजी की बारात में आए हो?’  हमारे मास्टरजी का यह ताना उनका तकियाकलाम टाइप बन गया था. न सिर्फ मास्टरजी के मुंह से, बल्कि घर में भी शिवजी की बारात’ वाली झिड़की कई बार सही. यह ताना मेरे बालमन में लंबे वक्त तक गूंजता रहा.

तब सोचता था, यार ये शिवजी की बारात का चक्कर क्या है? और फिर शिवजी की ही बारात क्यों? किसी और की क्यों नहीं? आखिर उस बारात में ऐसी क्या ख़ास बात थी कि मास्टरजी और घरवालों ने भी उसे ताना कसने का औज़ार बना दिया? आखिर शिवजी की बारात लोकोक्ति में कैसे बदल गई? न सिर्फ मास्टरजी, बल्कि दूसरे लोग भी झिड़कने लगते, हुंअ…! चले आए शिवजी की बारात में.

मेरे गांव का शिवालय. अपने मोबाइल फोन से लिया फोटो

तब अपने खुराफ़ाती दिमाग़ में कभी-कभी ऐसा ख्याल भी आता था कि हो सकता है कि शिवजी की बारात बड़ी बिंदास किस्म की रही हो. वो हमारी तरह अराजक और लापरवाह रही हो. वो तमाम औपचारिकताओं और अनुशासन से मुक्त रही हो. उसमें बारातियों के लिए कार्ड की अनिवार्यता न रही हो. शिवजी की बारात में बस दो चीज़ें तय रही होंगी. एक तो दूल्हा, यानी खुद शिवजी और दूसरी दुल्हन, यानी पार्वती जी. लेकिन बारातियों की संख्या फिक्स नहीं रही होगी. शिवजी की बारात में बारातियों की कोई कैटेगरी भी नहीं रही होगी. मतलब बड़े से बड़ा बंदा और छोटा से छोटा शख्स, हर कोई बाराती रहा होगा. गणवेश अर्थात् ड्रेस कोड जैसी कोई चीज़ भी नहीं रही होगी. जो भी और जिस भी दशा में रास्ते में मिला, सब बारात में शरीक हो लिए. बिना किसी फॉर्मैलिटी के. बिना किसी निमंत्रण के.

कैसी थी शिवजी की बारात? 

इस रहस्य को जानने के चक्कर में बचपन में टीवी पर धार्मिक फ़िल्में भी देखीं. धारावाहिक भी देखे. बाद में किताबों से भी इससे जुड़े कुछ सूत्र मिले. तब कुछ ज्ञानचक्षु खुले. तब मालूम हुआ कि शिवजी की बारात तो बड़ी विचित्र किस्म की बारात थी. मान्यताओं के मुताबिक, शिवजी की बारात में देवता तो थे ही, उनके गण भूत, प्रेत, पिशाच आदि भी थे. इसका जिक्र एक छंद में कुछ इस तरह मिलता है-

गांव के शिवालय की घंटियां बजाने की कोशिश करता मेरा बेटा

‘तन कीन कोउ अति पीन पावन कोउ अपावन गति धरें।
भूषन कराल कपाल कर सब सद्य सोनित तन भरें॥
खर स्वान सुअर सृकाल मुख गन बेष अगनित को गनै।

बहु जिनस प्रेत पिसाच जोगि जमात बरनत नहिं बनै॥

(इसका भावार्थ कुछ इस प्रकार है:- कोई बहुत दुबला, कोई बहुत मोटा, कोई पवित्र और कोई अपवित्र वेष धारण किए हुए है। भयंकर गहने पहने हाथ में कपाल लिए हैं और सब के सब शरीर में ताजा खून लपेटे हुए हैं। गधे, कुत्ते, सूअर और सियार के से उनके मुख हैं। गणों के अनगिनत वेषों को कौन गिने? बहुत प्रकार के प्रेत, पिशाच और योगिनियों की जमातें हैं। उनका वर्णन करते नहीं बनता।)

खुद उस बारात के दूल्हा यानी शिवजी की वेशभूषा कैसी थी, इसका जिक्र इस चौपाई में हुआ है-
ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा॥
गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला॥

(इसका भावार्थ है:-  शिवजी के सुंदर मस्तक पर चन्द्रमा, सिर पर गंगाजी, तीन नेत्र, साँपों का जनेऊ, गले में विष और छाती पर नरमुण्डों की माला थी। इस प्रकार उनका वेष अशुभ होने पर भी वे कल्याण के धाम और कृपालु हैं)

तो ऐसी थी हिमालयी देव शिवजी की बारात. वैसे मान्यताओं में शिवजी की छवि एक उदार, भोले, सहिष्णु और लोकतांत्रिक देवता की है. लोगों ने शिवजी को कई नाम दिए, जैसे- भोले बाबा, रमता जोगी, शंभूनाथ, महादेव इत्यादि. ऐसे देव जिन्होंने अपने ब्याह में किसी बाराती से नहीं पूछा कि भइया, तुम किसके निमंत्रण पर और ये कैसी वेशभूषा में मुंह उठाकर बारात में चले आए? ऐसा कहा जा सकता है कि शिवजी की बारात के लिए उस दौर में देवताओं के समूहों से लेकर प्रेतों तक सबने अपने क्लास, अपनी विचारधारा, अपनी निजी प्रतिबद्धताओं को भी परे रख दिया होगा. ठीक वैसे ही जैसे चुनावी बारातों में नेता लोग पार्टियों और गठबंधनों की घेरबाड़ तोड़कर कहीं से कहीं पहुंच जाते हैं. मतलब लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया टाइप. लेकिन लगता है कि आज राजनीतिक दलों ने शिवजी की बारात को दूसरे अर्थों में ले लिया. ये भी नहीं देखा कि उनकी चुनावी बारात में बागी-दागी भी साथ हो लिए.

Admin
Manu Panwar is the Founder of Himalayan Talks and a distinguished Broadcaster, Author, and Columnist with a career spanning nearly 30 years. A veteran of the Indian media landscape, he has held pivotal leadership roles at premier Television networks including ABP News, STAR News, India TV, and Sahara India Television.Began his journey in 1996 as a Reporter for the prominent Hindi daily Amar Ujala.

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