April 9, 2026
Chicago 12, Melborne City, India

Manu Panwar

administrator
अल्मोड़ा की कचहरी अब अतीत की बात हो चुकी है। कचहरी का माल असबाब उठ चुका है। कुछ कहीं और शिफ्ट हो गया होगा, कुछ नष्ट हो गया होगा, और कुछ यहीं रह गया होगा। जो यहां रह गया है वो अब संग्रहालय का हिस्सा होगा। मेरे यादों के संग्रहालय से कचहरी कभी ढ़ल ही नहीं सकी। कोर्ट कचहरी से लोग डरते हैं और अपन का बचपन, कई शामें और कई दिन कचहरी में बीते। अपन लोग अल्मोड़ा के बाजार के लोग थे, सो खेलने कूदने की जगह कम थी। अपने मोहल्ले में खेलने की एक ही जगह हो सकती थी वो कचहरी था
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कहां गायब हो रहे हैं पारंपरिक पहाड़ी घर?

ये तस्वीरें हमारे गांव की हैं। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में है गांव। ढलाऊ छत वाले मिट्टी-पत्थर के ऐसे मकान हमारे पहाड़ी

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लोग-बाग

बी.मोहन नेगी: उनके हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं

चित्रकार बी.मोहन नेगी ‘मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो, मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं।‘ जगजीत सिंह

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घूमघाम

अंग्रेज क्या छोड़कर गए?

उत्तराखंड के चकराता के पास डाक बंगला हमें फ़िल्म ‘शोले’ का शुक्रगुज़ार होना चाहिए जो ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ वाले डायलॉग के

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लोग-बाग

हरिद्वार या हरद्वार : सही नाम क्या है?

क्या आपने कभी सोचा कई जगह आपको हरिद्वार का नाम अंग्रेजी में हरद्वार क्यों लिखा मिलता है? जब इसका नाम हरिद्वार है-तो अंग्रेजी

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लोग-बाग

…जब एचएन बहुगुणा ने इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ ‘देवता’ नचाया

( भारतीय राजनीति में हेमवती नन्दन बहुगुणा की गिनती एक धाकड़ और विद्रोही किस्म के नेताओं में होती है. वो किस कदर निडर लीडर थे,

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लोग-बाग

मेरे अध्यापक, जिन्होंने विविधता के सौंदर्य की समझ विकसित की

इंद्र मोहन मुदगिल. यही नाम था हमारे स्कूल के प्रिंसिपल का, जिन्होंने हमें पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक सीख दी. जिन्होंने पेड़ों की अहमियत बताई.

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लोग-बाग

वो आदमी नहीं, मुकम्मल बयान है…

(जो लोग उत्तराखण्ड के पहाड़ों के समाज, जीवन और वहां के लोक की संस्कृति को समझते–जानते हैं, उनके लिए नरेन्द्र सिंह नेगी कोई

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लिखा-पढ़ी

…अगला नम्बर आपका है

शायर डॉ. नवाज देवबंदी के साथ उस दिन की फोटो  “जिन पर लुटा चुका था मैं दुनिया की दौलतें     उन वारिसों ने मुझको

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लोग-बाग

राजेन टोडरिया : एक जीनियस पत्रकार की याद

वो 5 फरवरी की ही तारीख थी. साल 2013. सुबह-सुबह की बात है. दिल्ली में घर पर सोया हुआ था. देहरादून से पत्रकार

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लोग-बाग

राकेश खण्डूड़ी : एक भलेमानुस का जाना

हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर अपने अभिन्न मित्र राकेश खण्डूड़ी को हमेशा के लिए विदा करके लौट आया हूं. लेकिन कल दिल्ली से

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