April 8, 2026
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आजकल

आजकल लोग-बाग

कृपया दरवाजों से हटकर खड़े हों !

शम्मी नारंग के साथ मुलाकात की एक तस्वीर कुछ आवाज़ें, कुछ छवियां ज़ेहन में हमेशा ताज़ा रहती हैं. बरसों तक, दशकों तक, उम्र भर गूंजती रहती हैं. शम्मी नारंग भी ऐसी ही शख्सियत हैं. बहुत ज्यादा वक़्त नहीं बीता है लेकिन मानो एक युग गुज़र गया है. दूरदर्शन के युग में, जबकि टेलीविज़न न्यूज़ में

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अथश्री ‘इलीगल’ कथा !

बात उन दिनों की है जब हम शिमला में अख़बार में पत्रकारिता किया करते थे. शिमला में अवैध निर्माण से जुड़ी एक स्टोरी का पीछा करते-करते कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे कि दंग रह गया. शायद वो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की रिपोर्ट थी. जिससे पता चला कि शिमला में हाईकोर्ट की बहुमंजिला इमारत

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श्रीकृष्ण की राजनीति के कितने करीब है आज की राजनीति?

(दिवंगत राजेन टोडरिया हमारे समय के धाकड़ पत्रकार / लेखक रहे हैं. वह हमारे बॉस भी रहे और मेंटॉर भी. राजेनजी की पत्रकारिता उत्तराखण्ड से शुरू होकर हिमाचल तक गई. वह हिमाचल में ‘दैनिक भास्कर‘ के संपादक थे. उससे पहले ‘अमर उजाला‘ अख़बार में हिमाचल प्रभारी थे. उनकी लेखनी बेहद धारदार और कमाल की थी. फरवरी 2013

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क्या उत्तराखण्ड क्रान्ति दल से हो पाएगा? — मनु पंवार

पिछले कुछ समय से जब से हमारे उत्तराखंड में क्षेत्रीय अस्मिताओं के मुद्दों ने सिर उठाया है, उनको लेकर गोलबंदी शुरू हुई है। यूकेडी को लेकर एक अलग सेंटिमेंट नज़र आता है। ये जानते हुए भी कि यूकेडी की अपनी समस्याएं कितनी विकट हैं, इस समय उसकी स्थिति क्या है—उसके पास लीडरशिप की क्राइसिस है,

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सतपाल महाराज के ‘बैंड, बाजा, बारात’ की इनसाइड स्टोरी — मनु पंवार।

उत्तराखण्ड की राजनीति में और कुछ हो न हो, मनोरंजन की कोई कमी नहीं है। फुल एंटरटेनमेंट है। इतनी सारी तकलीफों में घिरी पब्लिक को कुछ एनजॉयमेंट मिल जाता है, वो भी फ्री में। अब इससे ज्यादा अच्छे दिन और क्या चाहिए। अभी हुआ क्या है कि धामी सरकार के हैवीवेट कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज,

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पानी ने हमारा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ दिया है – मनु पंवार

  ऐसे मौसम में गांव आना हुआ जब हमारे गृह राज्य की सरकार बहादुर अपनी पीठ थपथपाने में मस्त है. बड़ा शोर सुना कि समान नागरिक संहिता वाला पहला राज्य होने जा रहे हैं. जहां-तहां गर्व के गुब्बारों को हवा दी जा रही थी, सो हमने भी सोचा कि ‘गर्व’ के एकाध छींटे इधर भी

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पत्रकारिता की फिक्र छोड़िए, पहले समाज को बचाइए

गांव की बचपन की यादें हैं। जो पहाड़ में रहे हैं या अभी रह रहे हैं, उन्हें तो पता ही होगा। हमारे गांव के पुंगड़ों (खेतों) में लोग अक्सर खड़ी फसल के बीच कुछ-कुछ फासले पर पुतले खड़े कर दिया करते थे। फटे-पुराने, अनुपयोगी कपड़ों से बने या घास-फूस से बने पुतले। पुतलों को कुछ

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हिमाचली टोपी : सरकार बदलते ही बदल जाता है रंग मनु पंवार

हिमाचल प्रदेश में सरकार ही नहीं, टोपियां भी सत्ताच्युत हुई हैं. वीरभद्र सिंह की सरकार जाने के साथ ही उनके ट्रेडमार्क हरी टोपी को भी राजनीतिक वनवास मिल गया. टोपियां हिमाचल प्रदेश के लोकजीवन का ही नहीं, राजनीतिक संस्कृति का भी अहम हिस्सा है. ये बात जुदा है कि यहां टोपियों का रंग सरकारों के

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राजनीतिक प्रहसन में क्यों बदल गए नए राज्य? मनु पंवार

  पंद्रह बरस का वक़्त कम नहीं होता यह समझने के लिए कि देश में नई बनी छोटी प्रशासनिक इकाइयां आखिर विफल क्यों रहीं? ठीक पंद्रह साल पहले सन् 2000 में देश के नक्शे में तीन नए राज्य उग आए थे। उत्तराखण्ड, झारखण्ड और छत्तीसगढ़। हालांकि छत्तीसगढ़ को तब गिफ्ट माना गया क्योंकि उत्तराखण्ड और

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बड़कोट।उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी ने रविवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में स्वतंत्र और स्वतंत्र प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया।

बड़कोट।उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी ने रविवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में स्वतंत्र और स्वतंत्र प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने उन पत्रकारों की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकार आज भी भ्रष्टाचार और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहते

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