April 10, 2026
Chicago 12, Melborne City, India

Manu Panwar

administrator
अल्मोड़ा की कचहरी अब अतीत की बात हो चुकी है। कचहरी का माल असबाब उठ चुका है। कुछ कहीं और शिफ्ट हो गया होगा, कुछ नष्ट हो गया होगा, और कुछ यहीं रह गया होगा। जो यहां रह गया है वो अब संग्रहालय का हिस्सा होगा। मेरे यादों के संग्रहालय से कचहरी कभी ढ़ल ही नहीं सकी। कोर्ट कचहरी से लोग डरते हैं और अपन का बचपन, कई शामें और कई दिन कचहरी में बीते। अपन लोग अल्मोड़ा के बाजार के लोग थे, सो खेलने कूदने की जगह कम थी। अपने मोहल्ले में खेलने की एक ही जगह हो सकती थी वो कचहरी था
किस्सागोई

…जब मैं सचिन के सामने नि:शब्द था

यह वर्ष 2002 के नवम्बर महीने की ही बात है। यानी आज से करीब 17 साल पहले। उस समय मैं उत्तर भारत के

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आजकल लोग-बाग

कृपया दरवाजों से हटकर खड़े हों !

शम्मी नारंग के साथ मुलाकात की एक तस्वीर कुछ आवाज़ें, कुछ छवियां ज़ेहन में हमेशा ताज़ा रहती हैं. बरसों तक, दशकों तक, उम्र

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आजकल

अथश्री ‘इलीगल’ कथा !

बात उन दिनों की है जब हम शिमला में अख़बार में पत्रकारिता किया करते थे. शिमला में अवैध निर्माण से जुड़ी एक स्टोरी

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घूमघाम

यहां पानी के टैंक के ऊपर शपथ लेती है सरकार !

शिमला में इसी रिज़ मैदान पर नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो रहा है नहीं..नहीं…. ये वो पानी की टंकी नहीं है

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लोग-बाग

चले आए शिवजी की बारात में !

हमारी नगरी पौड़ी (उत्तराखंड) के क्यूंकालेश्वर में शिव की मूरत बचपन का किस्सा है. पहाड़ में कई बार स्कूल जाते वक्त कोई किताब,

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आजकल

श्रीकृष्ण की राजनीति के कितने करीब है आज की राजनीति?

(दिवंगत राजेन टोडरिया हमारे समय के धाकड़ पत्रकार / लेखक रहे हैं. वह हमारे बॉस भी रहे और मेंटॉर भी. राजेनजी की पत्रकारिता उत्तराखण्ड से

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लोग-बाग

इस ‘पण्डत’ को हिमाचल नहीं भुला पाएगा

हिमाचल प्रदेश में सुखराम अपने समर्थकों/प्रशंसकों के बीच ‘पण्डत सुखराम’ के नाम से जाने जाते थे. समर्थकों के लिए वो देश में संचार

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खान-पान

जख्या : गाली भी और स्वाद भी !

यह है जख्या, काले-भूरे दाने वाला बीज ऐसा आपने कई लोगों के मुंह से और अक्सर सुना होगा- अजी! आपकी तो गाली भी

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खान-पान

घर-घर महक रहे विपिन के मसाले

हमारी रसोई में लंबे समय से पहाड़ी मसाले महक रहे हैं, वो भी विपिन पंवार की बदौलत. वैसे इसमें कोई अचरज नहीं है

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रहन-सहन

कहां गायब हो रहे हैं पारंपरिक पहाड़ी घर?

ये तस्वीरें हमारे गांव की हैं। उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में है गांव। ढलाऊ छत वाले मिट्टी-पत्थर के ऐसे मकान हमारे पहाड़ी

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