May 11, 2026
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खान-पान

घर-घर महक रहे विपिन के मसाले

हमारी रसोई में लंबे समय से पहाड़ी मसाले महक रहे हैं, वो भी विपिन पंवार की बदौलत. वैसे इसमें कोई अचरज नहीं है लेकिन इस महक के पीछे एक युवा की जी-तोड़ मेहनत, उनका जज़्बा, उनका पुरुषार्थ है.

विपिन कभी दिल्ली में रहते थे, अब उत्तराखण्ड के टिहरी ज़िले के प्रतापनगर में अपने गांव में रहते हैं. विपिन ने दिल्ली जैसे महानगर में एक बड़ी कंपनी में जमी-जमाई नौकरी छोड़ कर सीधे पहाड़ों का रूख किया. ‘आउट ऑफ दी बॉक्स’ सोचा और अब तो अपने पैर जमा लिए. वो भी महज पांच-छह साल के भीतर. आज उनके बनाए ‘केदार मसाले’ कई जगह अपनी महक बिखेर रहे हैं.

विपिन जब दिल्ली में थे, उनसे तब की मुलाकात है. शायद 7-8 साल हो गए होंगे. वह रचनात्मक व्यक्ति हैं यह तो मालूम था लेकिन उद्यमी किस्म के व्यक्ति भी हैं, यह कई साल बाद तब मालूम हुआ जब उनके द्वारा तैयार पहाड़ी मसालों की चर्चा इधर-उधर सुनी.

अभी करीब 5 साल ही हुए हैं जब विपिन दिल्ली को बाय-बाय करके वापस पहाड़ लौटे थे. ठीक-ठाक तनख्वाह और जमी-जमाई नौकरी को खूंटे पर टांगकर निकल लिए. कुछ इस अंदाज़ में कि- ‘यह ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहि नाच नचायो…’

लेकिन विपिन प्रयोगधर्मी हैं तो पहाड़ में जाकर नया प्रयोग किया. टिहरी के प्रताप नगर में पहले कीवी की पौध रोपी. उसका फल मिलने लगा तो पिछले दो साल से पहाड़ी मिक्स मसाले तैयार करके घर-घर पहुंचा रहे हैं.

विपिन के इन पहाड़ी मिक्स मसालों की ख़ासियत यह है कि वो आपको अपने घर-गांव की याद दिलाते हैं. गढ़वाली में इसे ‘खुद’ लगना और कुमाऊंनी में ‘निराई’ कहते हैं. पहाड़ में घर में मिट्टी के चूल्हे पर बने खाने का स्वाद बरसों बाद भी जिन लोगों की स्वाद ग्रंथियों में रचा-बसा होगा, वो जानते होंगे उस खाने के स्वाद में चूल्हे की आंच भी एक कारक मानी जाती रही है, लेकिन उसमें एक बड़ी भूमिका निभाते हैं अपने किचन गार्डन में उगे मसाले। सिलबट्टे में जब वो मसाले पीसे जा रहे होते हैं तभी उनकी खुशबू सीधे नथुनों में घुसकर किसी की भी भूख बढ़ा देती है. फिर घोल बनाकर जब वो किसी भी साग-सब्जी में डलते हैं तो उसका टेस्ट द्विगुणित कर देते हैं.

ऐसी सिचुएशन पर उत्तराखण्ड के जाने-माने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के एक गढ़वाली गीत की पंक्तियां भी याद आ रही हैं-

‘मूळे थिंच्वाणी मां जख्या कु तुड़का

कबलाट प्वटग्यूं ज्वनि कि भूख.’

(भावार्थ : मूली की थिंच्वाणी (पहाड़ी डिश) में जख्या का तड़का पेट में कुलबुलाहट पैदा कर देता है. आखिर जवानी की भूख जो ठहरी। )

टिहरी के विपिन पंवार ‘केदार’ ब्रैंड से जो पहाड़ी मिक्स मसाले तैयार कर रहे हैं, उनको इस्तेमाल करते हुए कुछ ऐसा ही फील हो रहा है.

Admin
Manu Panwar is the Founder of Himalayan Talks and a distinguished Broadcaster, Author, and Columnist with a career spanning nearly 30 years. A veteran of the Indian media landscape, he has held pivotal leadership roles at premier Television networks including ABP News, STAR News, India TV, and Sahara India Television.Began his journey in 1996 as a Reporter for the prominent Hindi daily Amar Ujala.

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