March 2, 2026
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बड़कोट।उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी ने रविवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में स्वतंत्र और स्वतंत्र प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया।

बड़कोट।उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी ने रविवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में स्वतंत्र और स्वतंत्र प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया।

उन्होंने उन पत्रकारों की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकार आज भी भ्रष्टाचार और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका में रहते है।
जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुनील थपलियाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रेस दिवस, जो प्रतिवर्ष 16 नवंबर को मनाया जाता है, 1966 में भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) की स्थापना का स्मरण कराता है और एक लोकतांत्रिक समाज में एक स्वतंत्र, ज़िम्मेदार और नैतिक प्रेस के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि आपदा के लिहाज से संवेदनशील जनपदों में कार्यरत पत्रकारों का 50 लाख का बीमा हो और तहसील व ब्लॉक स्तर के पत्रकारों को मान्यता मिले की मांग की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि
पीसीआई की स्थापना भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम, 1965 के तहत की गई थी। 1965 के अधिनियम को बाद में 1975 में निरस्त कर दिया गया और उसके बाद एक नया अधिनियम बनाया गया। इस नए कानून के तहत, 1979 में भारतीय प्रेस परिषद का पुनर्गठन किया गया।
एक स्वतंत्र निकाय के रूप में स्थापित, भारतीय प्रेस परिषद की प्राथमिक भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि प्रेस बाहरी प्रभावों से मुक्त रहते हुए पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखे। परिषद का विचार सबसे पहले 1956 में प्रथम प्रेस आयोग द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा और नैतिक रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया था। वरिष्ठ पत्रकार विजय पाल रावत ने कहा कि पत्रकार साक्ष्य के साथ तथ्यात्मक खबरों को लिखे। पत्रकार अनिल रावत ने कहा कि प्रशासन खबरों का संज्ञान ले। पत्रकार जयप्रकाश बहुगुणा ने कहा कि राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पत्रकारों
का सम्मान होने के साथ सरकार तहसील व ब्लॉक स्तर के पत्रकारों को मान्यता मिले। इस मौके पर नायब तहसीलदार खजान असवाल, पत्रकार दिनेश रावत, विजयपाल रावत,सुनील थपलियाल,द्वारिका सेमवाल, भगवती रतुड़ी, विनोद रावत,अनिल रावत, मदन पैन्यूली, उपेंद्र असवाल, अरविंद थपलियाल,सोबन असवाल, जय प्रकाश बहुगुणा, शांति टम्टा, सजंय हराण, सूर्यपाल सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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अल्मोड़ा की कचहरी अब अतीत की बात हो चुकी है। कचहरी का माल असबाब उठ चुका है। कुछ कहीं और शिफ्ट हो गया होगा, कुछ नष्ट हो गया होगा, और कुछ यहीं रह गया होगा। जो यहां रह गया है वो अब संग्रहालय का हिस्सा होगा। मेरे यादों के संग्रहालय से कचहरी कभी ढ़ल ही नहीं सकी। कोर्ट कचहरी से लोग डरते हैं और अपन का बचपन, कई शामें और कई दिन कचहरी में बीते। अपन लोग अल्मोड़ा के बाजार के लोग थे, सो खेलने कूदने की जगह कम थी। अपने मोहल्ले में खेलने की एक ही जगह हो सकती थी वो कचहरी था

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