September 20, 2026

आजकल

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पांच साल की बाध्यता में घुटती ज़िंदा कौमें मनु पंवार

राम मनोहर लोहिया कहा करते थे, ‘जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं’। लेकिन मुश्किल ये है कि किसी निर्वाचित सरकार या प्रतिनिधि को पांच साल ढोने की विवशता का कोई तोड़ हम आज तक नहीं ढूंढ पाए हैं। इस मजबूरी ने एक लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था को किस कदर बेबस और लाचार बना दिया है,

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