October 31, 2026

आजकल

आजकल

पानी ने हमारा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ दिया है – मनु पंवार

  ऐसे मौसम में गांव आना हुआ जब हमारे गृह राज्य की सरकार बहादुर अपनी पीठ थपथपाने में मस्त है. बड़ा शोर सुना कि समान नागरिक संहिता वाला पहला राज्य होने जा रहे हैं. जहां-तहां गर्व के गुब्बारों को हवा दी जा रही थी, सो हमने भी सोचा कि ‘गर्व’ के एकाध छींटे इधर भी

Read More
आजकल

पत्रकारिता की फिक्र छोड़िए, पहले समाज को बचाइए

गांव की बचपन की यादें हैं। जो पहाड़ में रहे हैं या अभी रह रहे हैं, उन्हें तो पता ही होगा। हमारे गांव के पुंगड़ों (खेतों) में लोग अक्सर खड़ी फसल के बीच कुछ-कुछ फासले पर पुतले खड़े कर दिया करते थे। फटे-पुराने, अनुपयोगी कपड़ों से बने या घास-फूस से बने पुतले। पुतलों को कुछ

Read More
आजकल

राजनीतिक प्रहसन में क्यों बदल गए नए राज्य? मनु पंवार

  पंद्रह बरस का वक़्त कम नहीं होता यह समझने के लिए कि देश में नई बनी छोटी प्रशासनिक इकाइयां आखिर विफल क्यों रहीं? ठीक पंद्रह साल पहले सन् 2000 में देश के नक्शे में तीन नए राज्य उग आए थे। उत्तराखण्ड, झारखण्ड और छत्तीसगढ़। हालांकि छत्तीसगढ़ को तब गिफ्ट माना गया क्योंकि उत्तराखण्ड और

Read More
आजकल

पांच साल की बाध्यता में घुटती ज़िंदा कौमें मनु पंवार

राम मनोहर लोहिया कहा करते थे, ‘जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं’। लेकिन मुश्किल ये है कि किसी निर्वाचित सरकार या प्रतिनिधि को पांच साल ढोने की विवशता का कोई तोड़ हम आज तक नहीं ढूंढ पाए हैं। इस मजबूरी ने एक लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था को किस कदर बेबस और लाचार बना दिया है,

Read More
error: Content is protected !!